Tittle:नवा रायपुर बनेगा ‘पीपल सिटी’: 108 जलाशयों और पीपल वन के किनारे होगा बड़े पैमाने पर पौधारोपण

छत्तीसगढ़ की राजधानी क्षेत्र नवा रायपुर को आने वाले वर्षों में एक नई पर्यावरणीय पहचान मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने शहर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, जिसके तहत शहर के 108 जलाशयों के किनारे और एक समर्पित पीपल वन में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इस पहल का मकसद है कि नवा रायपुर में किसी भी दिशा में नजर घुमाने पर पीपल का वृक्ष नजर आए।

क्या है ‘पीपल सिटी’ योजना?

यह योजना छत्तीसगढ़ के वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने रायपुर कलेक्टर रहते हुए ही ‘पीपल फॉर पीपल’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसे अब वृहद स्तर पर नवा रायपुर में लागू किया जा रहा है। योजना के पीछे सोच यह है कि पीपल, नीम और आम जैसे देशी वृक्ष ऑक्सीजन उत्पादन, भूजल संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता के लिए बाहर से लाए गए सजावटी पौधों की तुलना में कहीं अधिक उपयोगी साबित होते हैं।

लक्ष्य और समयसीमा

  • नवा रायपुर में अब तक करीब 70,000 पौधे पहले ही लगाए जा चुके हैं।
  • अगले 5 वर्षों में 1 लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • शहर में पहले से चिन्हित 108 जलाशयों के किनारों को पौधारोपण के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
  • एक समर्पित पीपल वन भी विकसित किया जा रहा है, जो भविष्य में शहर के प्रमुख हरित क्षेत्रों में गिना जाएगा।

क्यों चुना गया पीपल का पेड़?

पीपल का पेड़ भारतीय संस्कृति में जितना धार्मिक महत्व रखता है, उतना ही पर्यावरणीय दृष्टि से भी अहम है। यह पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ने की अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है, इसकी जड़ें भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करती हैं, और यह लंबे समय तक जीवित रहने वाला वृक्ष है। यही कारण है कि सरकार ने औपचारिकता निभाने के बजाय स्थानीय और टिकाऊ प्रजातियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

जलाशयों के किनारे पौधारोपण का महत्व

जलाशयों के आसपास पौधारोपण सिर्फ हरियाली बढ़ाने भर की कवायद नहीं है। पेड़ों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं, जलाशयों में गाद जमा होने की रफ्तार कम करती हैं, और आसपास के इलाके का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। लंबे समय में इसका सीधा फायदा जल संरक्षण और स्थानीय जलवायु को मिलेगा।

सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं

अधिकारियों ने साफ किया है कि अभियान की सफलता केवल तय संख्या में पौधे लगाने से नहीं आंकी जाएगी। लगाए गए हर पौधे के जीवित रहने की दर, नियमित देखभाल और संरक्षण की भी लगातार निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय उद्योगों और कंपनियों को भी अपने परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में पीपल रोपण से जोड़ने की योजना है, ताकि यह अभियान सरकारी दायरे से निकलकर एक जनआंदोलन का रूप ले सके।

निष्कर्ष

नवा रायपुर की ‘पीपल सिटी’ योजना छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर यह अभियान तय लक्ष्य और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में नवा रायपुर देश के सबसे हरित और टिकाऊ शहरी क्षेत्रों में शुमार हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. पीपल सिटी योजना क्या है? यह नवा रायपुर को बड़े पैमाने पर पीपल के पेड़ों से हरा-भरा बनाने की सरकारी योजना है, जिसके तहत अगले 5 वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाए जाएंगे।

2. इस योजना के तहत कितने जलाशयों को शामिल किया गया है? नवा रायपुर के 108 जलाशयों के किनारों को इस पौधारोपण अभियान में शामिल किया गया है।

3. यह अभियान किसकी पहल पर शुरू हुआ? यह अभियान वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की ‘पीपल फॉर पीपल’ पहल पर आगे बढ़ रहा है।

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