Tittle:उत्तर प्रदेश का शामली बना गन्ना उत्पादन में नंबर 1 जिला, जानें पूरी रिपोर्ट

शामली गन्ना उत्पादन 2026: UP का टॉप शुगर डिस्ट्रिक्ट कैसे बना | पूरी रिपोर्ट’ उत्तर प्रदेश का शामली जिला लगातार आठवें साल गन्ना उत्पादन में नंबर 1 बना। जानें उपज के आंकड़े, किसानों की आय, गन्ना मूल्य (SAP) और शामली की सफलता की पूरी कहानी। शामली गन्ना उत्पादन, उत्तर प्रदेश गन्ना, गन्ना मूल्य 2026, गन्ना किसान शामली, यूपी चीनी उद्योग


प्रकाशित: 22 जुलाई 2026 | श्रेणी: कृषि / चीनी उद्योग समाचार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का शामली जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य के प्रमुख कृषि-औद्योगिक जिलों में गिना जाने वाला शामली, गन्ना उत्पादन के मामले में लगातार आठ वर्षों (2018-19 से 2025-26) से प्रदेश में शीर्ष स्थान बनाए हुए है। बेहतर सिंचाई सुविधाओं, समय पर भुगतान और किसानों के आधुनिक कृषि तरीकों को अपनाने से यह उपलब्धि संभव हो पाई है।

शामली की गन्ना उपज के ताज़ा आंकड़े

2025-26 के पेराई सत्र में शामली जिले में गन्ने की औसत उपज 969.12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। तुलना के लिए देखें तो:

जिलाउपज (क्विंटल/हेक्टेयर)
शामली969.12
बागपत914.16
मुजफ्फरनगर900.96

गौरतलब है कि शामली ने इससे पहले 2023-24 सीज़न में 1,036.04 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज हासिल कर अपना ही रिकॉर्ड बनाया था, जो आज भी जिले की सर्वश्रेष्ठ उपज दर मानी जाती है।

कितने किसान और कितना क्षेत्रफल

जिले में लगभग 75,000 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती होती है, जिससे जुड़े किसानों की संख्या 1.5 लाख से अधिक है। ये किसान जिले की करीब आधा दर्जन चीनी मिलों को कच्चे माल की आपूर्ति करते हैं।

शामली की सफलता के पीछे की वजहें

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार शामली की बढ़त के पीछे कई कारण हैं:

  • उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी — क्षेत्र की मिट्टी गन्ने की खेती के लिए बेहद अनुकूल है
  • बेहतर सिंचाई — नहरों और ट्यूबवेल से भरोसेमंद जल आपूर्ति
  • उन्नत बीज किस्में — किसानों का उन्नत/प्रमाणित गन्ना किस्मों को अपनाना
  • समय पर बुवाई और कीट प्रबंधन — आधुनिक कृषि पद्धतियों का पालन

गन्ना मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025-26 सीज़न के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (State Advised Price – SAP) में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। इसके बाद नई दरें इस प्रकार हैं:

  • अगेती किस्म (Early Variety): ₹400 प्रति क्विंटल
  • सामान्य किस्म (General Variety): ₹390 प्रति क्विंटल

इससे जिले की चीनी मिलों को भी किसानों को पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

उत्तर प्रदेश की चीनी अर्थव्यवस्था में शामली की भूमिका

उत्तर प्रदेश देश में गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन में सबसे आगे है, और राज्य के करीब 48 लाख किसान परिवार इस उद्योग से जुड़ी आजीविका पर निर्भर हैं। शामली इस पूरी शृंखला — चीनी, एथेनॉल और गुड़/खांडसारी उत्पादन — में एक अहम कड़ी के रूप में उभरा है।

एथेनॉल उत्पादन की दिशा में बढ़ते कदम

राज्य सरकार गन्ने के रस और शीरे को सीधे ईंधन (एथेनॉल) उत्पादन की ओर मोड़ने को बढ़ावा दे रही है, जिससे किसानों को मूल्य संवर्धन (value addition) का लाभ मिल रहा है।

वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना से बढ़ावा

ODOP योजना के तहत शामली के प्रीमियम गुड़ और खांडसारी को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। GI टैग (भौगोलिक संकेतक) वाले उत्पादों के जरिए निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है, और अनुमान है कि आने वाले समय में 30-35 लाख टन तक निर्यात संभव है। किसान उत्पादक संगठन (FPOs) भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

बेहतर सड़क संपर्क से मिलेगा और फायदा

प्रस्तावित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (अंबाला-शामली खंड सहित) और शामली-गोरखपुर ऊर्जा गलियारा जैसी परियोजनाएं पूरी होने पर शामली की गन्ना और चीनी आपूर्ति शृंखला की लॉजिस्टिक क्षमता और मजबूत होगी।

चुनौतियां भी बरकरार

हर उपलब्धि के साथ चुनौतियां भी हैं — किसानों को भुगतान में कभी-कभी देरी और रेड रॉट जैसी फसल बीमारियां प्रमुख समस्याएं बनी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नीतिगत समर्थन से आने वाले समय में इनका समाधान निकाला जाएगा।

निष्कर्ष

आंकड़े साफ बताते हैं कि शामली सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की गन्ना अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। बेहतर उपज, समय पर भुगतान और नई योजनाओं के दम पर आने वाले वर्षों में जिले की यह बढ़त और मजबूत होने की उम्मीद है।


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